Dushyant Kumar Ki Famous Shayari Aur Ghazaleyn

Dushyant Kumar Ki Shayari  की ये पोस्ट शायरी के उन  fans के लियए ये पोस्ट खास तौर पे बनाई गयी है. मुझे पूरी उम्मीद है कि, आप सब को Dushyant Kumar Ki Famous Shayari बहोत पसंद आएगी.

दुष्यंत कुमार जाने माने हिंदी कवि और ग़ज़लकार थे.

दुष्यंत कुमार का पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था. दुष्यंत कुमार उत्तर प्रदेश में बिजनौर के रहने वाले थे. दुष्यंत कुमार ने शुरुआत में परदेसी के नाम से लिखना शुरू किया था.

दुष्यन्त कुमार का जन्म 01 सितम्बर 1933 को हुआ था. बहोत ही अप्रत्याशित तरीके से उनका निधन, असमय ही भोपाल में 30 दिसम्बर 1975 को हुआ था.

दुष्यंत कुमार ने इलाहबाद विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी. इसके बाद वो कुछ दिनों तक आकाशवाणी भोपाल में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रहे. उनकी पद्दोनिती प्रोड्यूसर पर हो चुकी थी, मगर पद ज्वाइन करने से पहले ही हमने हिन्दी साहित्याकाश का यह सूर्य खो दिया.

इलाहबाद में कमलेश्वर, मार्कण्डेय और दुष्यन्त की तीनो बहोत गहरे दोस्त थे. अपने जीवन में दुष्यन्त बहुत, सहज और अपनेय मन की करने वाले व्यक्ति थे.

जिस समय भोपाल के दो शायरों ताज भोपाली तथा क़ैफ़ भोपाली का ग़ज़लों की दुनिया पर राज था, दुष्यंत कुमार ने साहित्य की दुनिया में अपने कदम उसी समय रक्खे थे. हिन्दी, की बात करे तो, उस समय अज्ञेय तथा मुक्तिबोध की कठिन कविताओं का चलन था. आदमी की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए नागार्जुन तथा धूमिल जैसे कवि ही बच गए थे.

सिर्फ़ ४२ साल की छोटी सी ज़िन्दगी में दुष्यंत कुमार ने अपार ख्याति अर्जित की थी. इनके नाम पर दुष्यंत कुमार सम्मान पुरस्कार प्रारंभ किया गया है.

हिन्दी साहित्य में दुष्यन्त कुमार सूर्य की तरह देदीप्यमान हैं. हिन्दी गज़ल के क्षेत्र में जो लोकप्रियता दुष्यन्त कुमार को मिली वो दशकों बाद बहोत कम कवि को मिलती है.

एक कालजयी कवि है दुष्यन्त कुमार. और ऐसे कवि समय काल के हर पल में प्रासंगिक रहते हैं. दुष्यन्त कुमार, आज भी सड़क से संसद तक सुने देते हैं.

दुष्यन्त कुमार ने यूँ तो कविता ,गीत ,गज़ल ,काव्य नाटक ,कथा आदि सभी विधाओं में लिखा है. मगर दुष्यन्त कुमार की गज़लों की अपार लोकप्रियता उन्हे आम लोगों के बहोत करीब लाती है.

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari Aur Ghazaleyn

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari
Dushyant Kumar Ki Famous Shayari

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

Dushyant Kumar Shayari In hindi In English Fonts – मोटिवेशनल शायरी ऑफ़ दुष्यंत कुमार

Ho gaee hai peer parvat-see pighalanee chaahie
Is himaalay se koee ganga nikalanee chaahie

Aaj yah deevaar, paradon kee tarah hilane lagee,
Shart lekin thee ki ye buniyaad hilanee chaahie

Har sadak par, har galee mein, har nagar, har gaanv mein Haath laharaate hue har laash chalanee chaahie

Sirph hangaama khada karana mera makasad nahin,
Saaree koshish hai ki ye soorat badalanee chaahie

Mere seene mein nahin to tere seene mein sahee
Ho kaheen bhee aag, lekin aag jalanee chaahie

Dushyant Kumar Ghazal In Hindi

Dushyant Kumar Gghazal
Dushyant Kumar Ghazal

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है

एक चिंगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तों,
इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है

एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी,
आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है

एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,
यह अंधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है।

निर्वचन मैदान में लेटी हुई है जो नदी,
पत्थरों से, ओट में जा-जाके बतियाती तो है

दुख नहीं कोई कि अब उपलब्धियों के नाम पर,
और कुछ हो या न हो, आकाश-सी छाती तो है

Dushyant Kumar Motivational Shayari

Dukh nahin koee ki ab upalabdhiyon ke naam par,
Aur kuchh ho ya na ho, aakaash-see chhaatee to hai

Is nadee kee dhaar mein thandee hava aatee to hai,
Naav jarjar hee sahee, laharon se takaraatee to hai.

Also Read – Mirza Ghalib Shayari

Ek chingaaree kaheen se dhoondh lao doston,
Is die mein tel se bheegee huee baatee to hai.

Ek khandahar ke hrday-see, ek jangalee phool-see,
Aadamee kee peer goongee hee sahee, gaatee to hai.

Ek chaadar saanjh ne saare nagar par daal dee,
Yah andhere kee sadak us bhor tak jaatee to hai.

Nirvachan maidaan mein letee huee hai jo nadee,
Pattharon se, ot mein ja-jaake batiyaatee to hai

दुष्यंत कुमार शायरी इन हिंदी 

यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है
चलो यहाँ से चले और उम्र भर के लिये

दुष्यंत कुमार शायरी इन हिंदी
दुष्यंत कुमार शायरी इन हिंदी

कौन कहेगा हुकूमत से, कौन समझेगा
एक चिडिया इन धमाकों से सिहरती है 

वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिये

कौन कहता है आसमां मे सुराख नही हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों

एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,
यह अंधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है

Dushyant Kumar Ki Shayari

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मौत ने तो धर दबोचा एक चीते की तरह
ज़िंदगी ने जब छुआ फासला रखकर छुआ…

इस शहर मे बारात हो या वारदात
अब किसी भी बात पर खुलती नही हैं खिड़कियाँ…

कल मिला वो महफ़िल मे मुझे चिथरे पहने हुए
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान हूँ

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari
Dushyant Kumar Ki Famous Shayari

एक गुड़िया की कठपुतलीयों में जान है
आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान हैं

खास सदान बंद हैं तब से मरम्मत के लिए
ये हमारे वक्त की सबसे बड़ी पहचान है

एक बुद्धा आदमी है मुल्क में ये कहो
क्या अंधेरी कोठारी में एक रोशनदान है

मसालाहत आमेज होते हैं सियासत के कदम:
तू ना समाधान सियासत तू अभी इंसान है

कादर पबंदी-ए-मजहहब की सड़कें आपकी है
जब से आजादी मिली मुल्क में रमजान है

कल नुमाइश में मिला वो चीतरधे पहने हुए
मैंने पूछा नाम तो बोला हिंदुस्तान है

मुझ में रहते हैं करोदों लोग चुप कैसे रहूं
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है

Read Life Shayari

Dushyant Kumar Ki Top Shayari

Ek gudiya ki kai kathaputliyon mein jaan hai
aaj shayar ye tamasha dekh kar hairaan hai

khaas sadaken band hain tab se marammat ke liye
ye humare waqt ki sabse badi pahchaan hai

ek budha aadami hai mulk mein ya youn kaho
is andheri kothari mein ek roshandaan hai

maslahat aameez hote hain siyaasat ke kadam
tu na samajhega siyaasat tu abhi insaan hai

is kadar pabandi-e-mazahab ki sadaken aapki
jab se aazadi mili mulk mein ramzaan hai

kal numaaish mein mila wo cheethardhe pahne hue
maine poocha naam to bola hindustaan hai

mujh mein rahte hain karodon log chup kaise rahoon
har ghazal ab saltanat ke naam ek bayaan hai

Dushyant Kumar Poems In Hindi

चांदनी छत पे चल रही होगी
अब अकेली टहल रही होगी

Dushyant Kumar Poems In Hindi
Dushyant Kumar Poems In Hindi

फिर मेरा ज़िक्र आ गया होगा
वो बर्फ सी पिघल रही होगी

कल का सपना बहुत सुहाना था
ये उदासी न कल रही होगी

सोचता हूँ कि बंद कमरे में
एक शमा सी जल रही होगी

तेरे गहनों सी खनखनाती थी
बाजरे की फसल रही होगी

जिन हवाओं ने तुझको दुलराया
उनमें मेरी ग़ज़ल रही होगी

Dushyant Kumar Ki Best Shayari In Hindi

Chaandanee chhat pe chal rahee hogee
Ab akelee tahal rahee hogee

Phir mera zikr aa gaya hoga
Wo barph see pighal rahee hogee

Kal ka sapana bahut suhaana tha
Ye udaasee na kal rahee hogee

Sochata hoon ki band kamare mein
Ek shama see jal rahee hogee

Tere gahanon see khanakhanaatee thee
Baajare kee phasal rahee hogee

Jin havaon ne tujhako dularaaya
Unamen meree gazal rahee hogee

Faiz Ahmad Faiz Shayari

Dushyant Kumar Poetry

Dushyant Kumar Poetry
Dushyant Kumar Poetry

दुष्यंत कुमार कोट्स इन हिंदी

मत कहो आकाश में कोहरा घना है,
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है

सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह का,
क्या करोगे सूर्य का क्या देखना है

हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था,
शौक से डूबे जिसे भी डूबना है।

दोस्तों अब मंच पर सुविधा नहीं है,
आजकल नेपथ्य में सम्भावना है.

Mat kaho aakaash mein kohara ghana hai,
Yah kisee kee vyaktigat aalochana hai

Soory hamane bhee nahin dekha subah ka,
Kya karoge soory ka kya dekhana hai

Ho gayee har ghaat par pooree vyavastha,
Shauk se doobe jise bhee doobana hai.

Doston ab manch par suvidha nahin hai,
Aajakal nepathy mein sambhaavana hai.

मोटिवेशनल शायरी ऑफ़ दुष्यंत कुमार

अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए
तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए

हुज़ूर! आरिज़ो-ओ-रुख़सार क्या तमाम बदन
मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाए

उठा के फेंक दो खिड़की से साग़र-ओ-मीना
ये तिशनगी जो तुम्हें दस्तयाब हो जाए

वो बात कितनी भली है जो आप करते हैं
सुनो तो सीने की धड़कन रबाब हो जाए

बहुत क़रीब न आओ यक़ीं नहीं होगा
ये आरज़ू भी अगर कामयाब हो जाए

ग़लत कहूँ तो मेरी आक़बत बिगड़ती है
जो सच कहूँ तो ख़ुदी बेनक़ाब हो जाए.

Dushyant Kumar Poems – Dushyant Kumar Ki Shayari

Agar khuda na kare sach ye khvaab ho jae
Teree sahar ho mera aafataab ho jae

Huzoor! aarizo-o-rukhasaar kya tamaam badan
Meree suno to mujassim gulaab ho jae

Utha ke phenk do khidakee se saagar-o-meena
Ye tishanagee jo tumhen dastayaab ho jae

Wo baat kitanee bhalee hai jo aap karate hain
Suno to seene kee dhadakan rabaab ho jae

Bahut qareeb na aao yaqeen nahin hoga
Ye aarazoo bhee agar kaamayaab ho jae

Galat kahoon to meree aaqabat bigadatee hai
Jo sach kahoon to khudee benaqaab ho jae

Love Shayari Of Dushyant Kumar – दुष्यंत कुमार कविता अपनी प्रेमिका से

Love Shayari Of Dushyant Kumar
Love Shayari Of Dushyant Kumar

मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे
इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे

हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेड़ो मत
हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे

थोड़ी आँच बची रहने दो थोडा धुआँ निकलने दो
तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफ़िर आएँगे

उनको क्या मालूम निरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आए तो यहाँ शँख सीपियाँ उठाने आएँगे

फिर अतीत के चक्रवात में दृष्टि न उलझा लेना तुम
अनगिन झोंके उन घटनाओं को दोहराने आएँगे

रह-रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़े तो शायद दृश्य सुहाने आएँगे

मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे

हम क्यों बोलें इस आँधी में कई घरौन्दे टूट गए
इन असफल निर्मितियों के शव कल पहचाने जाएँगे

हम इतिहास नहीं रच पाए इस पीड़ा में दहते हैं
अब जो धारायें पकड़ेंगे इसी मुहाने आएँगे

Intezaar Shayari

Dushyant Kumar Ki Shayari In English

Mere svapn tumhaare paas sahaara paane aaenge
Is boodhe peepal kee chhaaya mein sustaane aaenge

Haule-haule paanv hilao jal soya hai chhedo mat
Ham sab apane-apane deepak yaheen siraane aaenge

Thodee aanch bachee rahane do thoda dhuaan nikalane do Tum dekhogee isee bahaane kaee musaafir aaenge u

Unako kya maaloom niroopit is sikata par kya beetee
We aae to yahaan shankh seepiyaan uthaane aaenge

Phir ateet ke chakravaat mein drshti na ulajha lena tum Anagin jhonke un ghatanaon ko doharaane aaenge

Rah-rah aankhon mein chubhatee hai path kee nirjan dopaharee
Aage aur badhe to shaayad drshy suhaane aaenge

Mele mein bhatake hote to koee ghar pahuncha jaata
Ham ghar mein bhatake hain kaise thaur-thikaane aaenge
Ham kyon bolen is aandhee mein kaee gharaunde toot gae
In asaphal nirmitiyon ke shav kal pahachaane jaenge

Ham itihaas nahin rach pae is peeda mein dahate hain
Ab jo dhaaraayen pakadenge isee muhaane aaenge

Best Ever Dushyant Kumar Poems Collection

Dushyant Kumar Poems
Dushyant Kumar Poems

रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है
यातनाओं के अँधेरे में सफ़र होता है

कोई रहने की जगह है मेरे सपनों के लिए
वो घरौंदा ही सही, मिट्टी का भी घर होता है

सिर में सीने में कभी पेट से पाओं में कभी
इक जगह हो तो कहें दर्द इधर होता है

दुष्यंत कुमार शायरी इन हिंदी

ऐसा लगता है कि उड़कर भी कहाँ पहुँचेंगे
हाथ में जब कोई टूटा हुआ पर होता है

सैर के वास्ते सड़कों पे निकल आते थे
अब तो आकाश से पथराव का डर होता है

Dushyant Kumar Ki Shayari – Ghazal

Roz jab raat ko baarah ka gajar hota hai
Yaatanaon ke andhere mein safar hota hai

Koee rahane kee jagah hai mere sapanon ke lie
Wo gharaunda hee sahee, mittee ka bhee ghar hota hai

Sir mein seene mein kabhee pet se paon mein kabhee
Ik jagah ho to kahen dard idhar hota hai

Aisa lagata hai ki udakar bhee kahaan pahunchenge
Haath mein jab koee toota hua par hota hai

Sair ke vaaste sadakon pe nikal aate the
Ab to aakaash se patharaav ka dar hota hai

I ama sure aap sab ko ye Dushyant Kumar Quotes, Dushyant Kumar Shayari, aur Dushyant Kumar Ghazals pasand aa rahi hongi. Dushyant Kumar ney jitna bhi kaha aur likha hai, jitni baar sun lo parh lo, kam hi lagta hai. Jitni baar bhi suno, fir sey sunney ka, parhney ka man karega.

Kuch aur rachnayen dekhi Dushyant Kumar ki.

Best Of Dushyant Kumar Famous Shayari 

Dushyant Kumar Famous Shayari 
Dushyant Kumar Famous Shayari

तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं

मैं बेपनाह अँधेरों को सुब्ह कैसे कहूँ
मैं इन नज़ारों का अँधा तमाशबीन नहीं

तेरी ज़ुबान है झूठी ज्म्हूरियत की तरह
तू एक ज़लील-सी गाली से बेहतरीन नहीं

तुम्हीं से प्यार जतायें तुम्हीं को खा जाएँ
अदीब यों तो सियासी हैं पर कमीन नहीं

तुझे क़सम है ख़ुदी को बहुत हलाक न कर
तु इस मशीन का पुर्ज़ा है तू मशीन नहीं

बहुत मशहूर है आएँ ज़रूर आप यहाँ
ये मुल्क देखने लायक़ तो है हसीन नहीं

ज़रा-सा तौर-तरीक़ों में हेर-फेर करो
तुम्हारे हाथ में कालर हो, आस्तीन नहीं.

Dushyant Kuamar Poems Shayari In English Fonts

Tumhaare paanv ke neeche koee zameen nahin
Kamaal ye hai ki phir bhee tumhen yaqeen nahin

Main bepanaah andheron ko subh kaise kahoon
Main in nazaaron ka andha tamaashabeen nahin

Teree zubaan hai jhoothee jmhooriyat kee tarah
Too ek zaleel-see gaalee se behatareen nahin

Tumheen se pyaar jataayen tumheen ko kha jaen
Adeeb yon to siyaasee hain par kameen nahin

Tujhe qasam hai khudee ko bahut halaak na kar
Tu is masheen ka purza hai too masheen nahin

Bahut mashahoor hai aaen zaroor aap yahaan
Ye mulk dekhane laayaq to hai haseen nahin

Zara-sa taur-tareeqon mein her-pher karo
Tumhaare haath mein kaalar ho, aasteen nahin

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari – दुष्यंत कुमार की कविता
Dushyant Kumar Ki Famous Shayari
Dushyant Kumar Ki Famous Shayari

लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है
लफ़्ज़ माने भी छुपाने लगे, ये तो हद है

आप दीवार गिराने के लिए आए थे
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है

ख़ामुशी शोर से सुनते थे कि घबराती है
ख़ामुशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है

आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है

जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में-
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है

लोग तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सलीक़े सीखे
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है

Dushyant Kumar Poetry – Dushyant Kumar Shayari

Lafz ehasaas-se chhaane lage, ye to had hai
Lafz maane bhee chhupaane lage, ye to had hai

Aap deevaar giraane ke lie aae the
Aap deevaar uthaane lage, ye to had hai

Khaamushee shor se sunate the ki ghabaraatee hai khaamushee shor machaane lage, ye to had hai

Aadamee honth chabae to samajh aata hai
Aadamee chhaal chabaane lage, ye to had hai

Jism paharaavon mein chhup jaate the, paharaavon mein
Jism nange nazar aane lage, ye to had hai

Log tahazeeb-o-tamaddun ke saleeqe seekhe
Log rote hue gaane lage, ye to had hai

Dushyant Kkumar Top Shayari

ये ज़ुबाँ हमसे सी नहीं जाती
ज़िन्दगी है कि जी नहीं जाती

इन सफ़ीलों में वो दरारे हैं
जिनमें बस कर नमी नहीं जाती

देखिए उस तरफ़ उजाला है
जिस तरफ़ रौशनी नहीं जाती

शाम कुछ पेड़ गिर गए वरना
बाम तक चाँदनी नहीं जाती

एक आदत-सी बन गई है तू
और आदत कभी नहीं जाती

मयकशो मय ज़रूर है लेकिन
इतनी कड़वी कि पी नहीं जाती

मुझको ईसा बना दिया तुमने
अब शिकायत भी की नहीं जाती

Dushyant Kkumar Ki Bemisal Ghazal

Ye zubaan hamase see nahin jaatee
Zindagee hai ki jee nahin jaatee

In safeelon mein vo daraare hain
Jinamen bas kar namee nahin jaatee

Dekhie us taraf ujaala hai
Jis taraf raushanee nahin jaatee

Shaam kuchh ped gir gae varana
Baam tak chaandanee nahin jaatee

Ek aadat-see ban gaee hai too
Aaur aadat kabhee nahin jaatee

Mayakasho may zaroor hai lekin
Itanee kadavee ki pee nahin jaatee

Mujhako eesa bana diya tumane
Ab shikaayat bhee kee nahin jaatee

Dushyant Kkumar Ke Sher O Shayari

अब सब से पूछता हूं बताओ तो कौन था
वो बदनसीब शख़्स जो मेरी जगह जिया

तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी है
तमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं

आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख,
पर अन्धेरा देख तू आकाश के तारे न देख

दस्तकों का अब किवाड़ों पर असर होगा ज़रूर
हर हथेली ख़ून से तर और ज़्यादा बेक़रार

कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है

लहू-लुहान नज़ारों का ज़िक्र आया तो
शरीफ़ लोग उठे दूर जा के बैठ गए

हालाते जिस्म, सूरते-जाँ और भी ख़राब
चारों तरफ़ ख़राब यहाँ और भी ख़राब

अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार
घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तहार

यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन
ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं

रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो

मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूँ पर कहता नहीं
बोलना भी है मना सच बोलना तो दरकिनार

आज मेरा साथ दो वैसे मुझे मालूम है
पत्थरों में चीख़ हर्गिज़ कारगर होगी नहीं

यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

Dushyant Kumar Ki Famous Shayari

Dushyant Kumar Ki Shayari 
Dushyant Kumar Ki Shayari

घंटियों की आवाज़ कानों तक पहुँचती है
एक नदी जैसे दहानों तक पहुँचती है

अब इसे क्या नाम दें, ये बेल देखो तो
कल उगी थी आज शानों तक पहुँचती है

खिड़कियां, नाचीज़ गलियों से मुख़ातिब है
अब लपट शायद मकानों तक पहुँचती है

आशियाने को सजाओ तो समझ लेना,
बरक कैसे आशियानों तक पहुँचती है

तुम हमेशा बदहवासी में गुज़रते हो,
बात अपनों से बिगानों तक पहुँचती है

सिर्फ़ आंखें ही बची हैं चँद चेहरों में
बेज़ुबां सूरत, जुबानों तक पहुँचती है

अब मुअज़न की सदाएं कौन सुनता है
चीख़-चिल्लाहट अज़ानों तक पहुँचती है

Best Of Dushyant Kumar Ki Shayari

Ghantiyon kee aavaaz kaanon tak pahunchatee hai
Ek nadee jaise dahaanon tak pahunchatee hai

Ab ise kya naam den, ye bel dekho to
Kal ugee thee aaj shaanon tak pahunchatee hai

Khidakiyaan, naacheez galiyon se mukhaatib hai
Ab lapat shaayad makaanon tak pahunchatee hai

Aashiyaane ko sajao to samajh lena,
Barak kaise aashiyaanon tak pahunchatee hai

Tum hamesha badahavaasee mein guzarate ho,
Baat apanon se bigaanon tak pahunchatee hai

Sirf aankhen hee bachee hain chand cheharon mein Bezubaan soorat, jubaanon tak pahunchatee hai

Ab muazan kee sadaen kaun sunata hai
Cheekh-chillaahat azaanon tak pahunchatee hai

दुष्यंत कुमार Ki Shayari On Love

किसी को क्या पता था इस अदा पर मर मिटेंगे हम
किसी का हाथ उठ्ठा और अलकों तक चला आया

वो बरगश्ता थे कुछ हमसे उन्हें क्योंकर यक़ीं आता
चलो अच्छा हुआ एहसास पलकों तक चला आया

जो हमको ढूँढने निकला तो फिर वापस नहीं लौटा
तसव्वुर ऐसे ग़ैर—आबाद हलकों तक चला आया

लगन ऐसी खरी थी तीरगी आड़े नहीं आई
ये सपना सुब्ह के हल्के धुँधलकों तक चला आया

जाने से पहले दुष्यंत कुमार की एक ग़ज़ल 

अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार
घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तिहार

आप बच कर चल सकें ऐसी कोई सूरत नहीं
रहगुज़र घेरे हुए मुर्दे खड़े हैं बे-शुमार

रोज़ अख़बारों में पढ़ कर ये ख़याल आया हमें
इस तरफ़ आती तो हम भी देखते फ़स्ल-ए-बहार

मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूँ पर कहता नहीं
बोलना भी है मना सच बोलना तो दरकिनार

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीक-ए-जुर्म हैं
आदमी या तो ज़मानत पर रिहा है या फ़रार

हालत-ए-इन्सान पर बरहम न हों अहल-ए-वतन
वो कहीं से ज़िंदगी भी माँग लाएँगे उधार

रौनक़-ए-जन्नत ज़रा भी मुझ को रास आई नहीं
मैं जहन्नम में बहुत ख़ुश था मिरे परवरदिगार

दस्तकों का अब किवाड़ों पर असर होगा ज़रूर
हर हथेली ख़ून से तर और ज़्यादा बे-क़रार

दोस्तों, आप यहाँ दुष्यंत कुमार की शायरी जितने मज़े से पढ़ रहे हैं, उसका अंदाज़ा है मुझे। मेरी कोशिश होगी कि जल्दी ही, Shayari of Dushyant Kumar, दुष्यंत कुमार के शेर, Dushyant Kumar ki kavita, Dushyant Kumar quotes in hindi, Dushyant Kumarr poems, Dushyant Kumar shayari, Dushyant Kumar shayari in hindi, Motivational Shayari Of Dushyant Kumar, Dushyant Kumar Motivational Poem, Dushyant Kumar Ki Ghazal, Dushyant Kumar Quotes, दुष्यंत कुमार की शायरी पे एक नयी पोस्ट लेकर आऊं। थोड़ा सा इंतज़ार करें, मैं जल्द आऊंगा। 

Kisee ko kya pata tha is ada par mar mitenge ham
Kisee ka haath uththa aur alakon tak chala aaya

Wo baragashta the kuchh hamase unhen kyonkar yaqeen aata
Chalo achchha hua ehasaas palakon tak chala aaya

Jo hamako dhoondhane nikala to phir vaapas nahin lauta
Tasavvur aise gair—aabaad halakon tak chala aaya

Lagan aisee kharee thee teeragee aade nahin aaee
Ye sapana subh ke halke dhundhalakon tak chala aaya

I am sure, आपको Dushyant Kumar के ये शेर, शायरी और ग़ज़लें बेहद अच्छी लगी होंगी. प्लीज इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग Dushyant Kumar को जानें और पढ़ें.

 

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