Rishton Mein Aakarshan Ka Niyam

Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam ख़ास होते हैं, और अगर आप थोड़ा गौर से देखे तो, आप मानेंगे कि, ये रिश्ता किसी भी तरह के संजोग से परे है।

दुनिया में हम कितने ही लोगो से मिलते हैं, क्या ये सभी हमारे दिल कि दहलीज़ तक आ  पाते हैं? क्या ये सभी हमें बहोत ख़ास लगते हैं? स्पष्ट और साफ़ जवाब है – ” नहीं “

उन तमाम लोगों में से बस चंद लोग ऐसे होते हैं जो हमारे दिलों में अपनी जगह बना पाते हैं, और कुछ लोग हमारे लिए बिलकुल ख़ास बन जाते है, हमेशा के लिए।

किसी भी Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam हमें ये बताते हैं कि, हम क्यों किसी ख़ास शख्स की तरफ खिंचे चले जाते हैं? क्यों एक ख़ास व्यक्ति हमरे दिलो दिमाग पे अपना असर छोड़ जाता है? और ऐसा हर किसी के साथ क्यों नहीं होता?

Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam

Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam
Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam

जब भी उस ख़ास आदमी से आप मिलते हैं, आपको छोटे-छोटे कुछ हद तक साफ़ इंडिकेशन्स या संकेत मिलेंगे। ये संकेत शारीरिक या मानसिक या दोनों हो सकते हैं। और ऐसी फीलिंग आपको हर किसी के साथ नहीं होगी। ये पहला लक्षण बनता है आपके लिए, वो व्यक्ति आपकी ज़िन्दगी में, आपके लिए बेहद ख़ास है।

अगर एक बात है जिसे मनोवैज्ञानिक विज्ञान ने हमेशा समझने की कोशिश की है तो वो मानवीय आकर्षण का रहस्य है। यदि हम हार्मोन, न्यूरोट्रांसमीटर और अन्य रासायनिक सृष्टियां के पहले से ही क्लासिक तंत्र के लिए जुनून और आकर्षण को समझाने के लिए तैयार न रहे, या इन बातो को माने ही न, तो हम कुछ हद तक न्यूनतावादी परिप्रेक्ष्य मान लेंगे। क्योंकि एक तरह से, हम सभी को लगता है कि, “कुछ तो है”।

प्रख्यात मानवविज्ञानी, जीवविज्ञानी और भावात्मक रिश्तों की विशेषज्ञ Helen Fisher , अपनी किताब “Why We Love, Nature and Chemistry of Love” में बताती है कि, “क्यों प्यार, और किसी के प्यार में खो जाना एक व्यक्तिगत choice  नहीं होती ।

हमारी ज़िन्दगी में कुछ लोग बिना कुछ किये, बिना हमारी जानकारी के, हमारे दिल में अपनी एक ख़ास जगह बना लेते हैं। और हमारे Rishton Mein Aakarshan Ke  Niyam यहीं से अपनी गतिविधियां शुरू करते हैं।

रिश्तों में आकर्षण के नियम सामाजिक, जैविक और मानवविज्ञान सिद्धांतों का जवाब देते हैं । प्यार के रहस्य को समझने का एक सफल तरीका

इसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देखना है, जहां यह बहुत संभव है कि कुछ दूसरों की तुलना में अधिक सटीक लगते हैं, लेकिन जहां वे सभी हमें एक बेहद दिलचस्प वैश्विक दृष्टि प्रदान करते हैं।

हाल के वर्षों में मनोविज्ञान की दुनिया तंत्रिका विज्ञान के दृष्टिकोण से परे अन्य दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छानबीन और शोध को  ज़्यादा महत्व दे रही है।।

बर्लिन विश्वविद्यालय से डॉ वेनेसा जे बोनह्स द्वारा किए गए अध्ययन हमें बताते हैं कि आज हम यौन आकर्षण के तंत्र को समझते हैं, लेकिन वास्तव में, न्यूरोकेमिस्ट्री के माध्यम से सब कुछ समझाया नहीं जा सकता है।

इसलिए विज्ञान और मनोविज्ञान के क्षेत्र के लिए “प्यार कैसे करवाया जाता है”, इसका एक कोई साफ़ स्पष्टीकरण देना बहुत मुश्किल है।

मगर रिश्तों में आकर्षण की शुरुआत से लेकर आगे बढ़ने तक ऐसी बहोत सारी चीज़ें एक श्रृंखला बनाती हुई चलती है, जो इस बात को समझने में हमारी मदद करती हैं कि, ऐसा क्यों और कैसे होता है। आइये इन श्रृंखलाबद्ध संकेतों पे एक नज़र डालें।

रिश्तों में आकर्षण के 4 कानून

1. Personality (व्यक्तित्व ) का नियम – Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam का सबसे  पहला नियम है 

Aakarshan Ke Niyam

हम अपनेआप को, अपनी भावनाएं, या अपनी किसी बात को कैसे व्यक्त करते है, इसका सीधा सा असर सामने वाले पर पड़ता है, और ये बात सर्वविदित है।

एक आदमी की पर्सोनलिटी, उसकी वेशभूषा और वो कैसा दिखता है से परे होती है। और ये रिश्तों में आकर्षण का पहला और बहोत महत्वपूर्ण नियम होता है

बातचीत करने की अच्छी समझ, धीरे धीरे हुई निकटता, और एक अनकहे माध्यम से जुड़ते चले जाना आपके ऊपर एक गहरी छाप छोड़ता है, और आप मानसिक रूप से कहीं भी विरोध नहीं कर पातें हैं उस शख्स का, जो आपके दिल में उतरता चला जाता है गहरे तक।

2. निकटता के नियम – रिश्तों में आकर्षण के नियम में से एक और खास नियम है 

रिश्तों में आकर्षण के नियम, रिश्तों में आकर्षण
रिश्तों में आकर्षण

रिश्तों में आकर्षण के नियमों के भीतर, यह सबसे सरल लग सकता है, लेकिन यह सच है। आमतौर पे हम सभी दिन में कई घंटे के लिए कोई आम जगह शेयर करते हैं। जैसे, कॉलेज, काम करने की जगह, gym आदि। अब हमें चाहे या पसंद हो या न हो, हम ऐसे माहौल में बहोत सारे लोगो से बातचीत करते हैं और अंततः ये चाही नाचही बातचीत धीरे धीरे सार्थक और अंतरंग बनने लगती है।

मगर इस तरह से बने रिश्तों की गर्माहट कब तक बनी रहती है, ये भी एक बहस का मुद्दा हो सकता है। 

आपने देखा होगा कि, स्कूल कॉलेज में साथ पढ़ने वाले, या एक ही जगह काम करने वाले लोग कैसे एक रिलेशनशिप में बंध जाते हैं। 

ऐसा इस सिद्धांत पे होता है, आप जिनके साथ अपने हर दिन का सबसे ज़्यादा वक़्त बिताते हैं, वो धीरे धीरे आपकी ज़िन्दगी का एक ज़रूरी हिस्सा हो जाते हैं।

3. समानता का नियम – Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam

समानता का नियम
Rishton Mein Aakarshan

अब मैं आपसे एक सवाल करती हूँ। आपको क्या लगता है? क्या अपोजिट  Sex आकर्षित करता है?

जी हाँ! कुछ मौकों पे  बिलकुल करता है। वहीँ कुछ शोध ये बात बताते हैं कि, हम सबसे ज्यादा उनलोगों की तरफ आकर्षित होते है, जिनके शौक (hobbies) हमारे शौक से ज्यादा मिलते जुलते हो।

इसलिए हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहना या होना चाहते हैं, हो हमारी सोच से मेल रखता हो, और जो हमारे हॉबीस और शौक को एक ही तरह देखता और समझता हो।

4. उपस्थिति या शारीरिक उपस्थिति का नियम

Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam

हम जानते हैं कि, Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam के तहत शारीरिक उपस्थिति अक्सर एक महत्वपूर्ण रोले प्ले करती है। हालांकि, यहाँ अत्यंत सूक्ष्म बात है, जिसका हमें ध्यान रखना चाहिए।

आप इस बात को मानेगे कि, साधारनतया हमारी आँखों को जो भाता है, हम उसी को देखते हैं. लेकिन ठीक उसी समय, लगभग हमारे देखे बिना, उन पुरुषों और महिलाओं में भी आम तौर पर हमारे समान लक्षण मौजूद होते हैं। ये समानता के नियम जैसा ही है, बस हमें उस वक्त ये पता नहीं रहता  है।

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हालांकि कुछ जोड़ों में आप शारीरिक मतभेद भी देख सकते है, जैसे कि, एक पार्टनर बहोत लम्बा हो, और दूसरा कद में काफी छोटा हो, एक पार्टनर काफी आकर्षक और वही दूसरा सामान्य सा भी न दिखता हो। मगर फिर भी इन कपल्स को एक दूसरे में पूर्णता मिलती है, इसलिए ये एक दूसरे के साथ होते हैं। 

Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam के अनुसार जब हमें हमारे साथ पूरी तरह सामंजस्य बिठाने वाला मिल जाता है तो हम उसके साथ अपना परिवार बसा लेते हैं, या बसा लेना चाहते हैं।

निष्कर्ष : 

हम Rishton Mein Aakarshan Ke Niyam की ऊपर बताई बातों से सहमत हो भी सकते हैं और नहीं भी।

हालांकि, हम में से ज्यादातर ने  ऊपर वर्णित कुछ बिंदुओं का वास्तविकता में कभी न कभी ज़रूर अनुभव किया होगा, जहां हमें कोई एक ख़ास आदमी अपने सबसे ज़्यादा करीब लगा होगा, और जो  हमें ,भौतिक चीज़े या फिर शारीरिक संरचना से बहोत परे बिलकुल ख़ास लगा हो।

हो सकता है कि इन तथ्यों के बावजूद विज्ञान हमेशा की तरह  हमें एक नया स्पष्टीकरण देना चाहे, फ़िलहाल तो हम सिर्फ यही कह सकते हैं कि आकर्षण का ब्रह्मांड उन शब्दों और पंक्तियों को आकर्षित करना जारी रखता है जिन्हें शायद केवल कवि और कलाकार ही  परिभाषित कर सकते हैं ।

आपके विचार क्या हैं इस पर, कमैंट्स सेक्शन में ज़रूर  बताये।

अपना ख्याल रख्खें और स्वस्थ रहें।

 

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